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रेलवे, जिला प्रशासन या दशहरा आयोजन समिति- अमृतसर ट्रेन एक्‍सीडेंट का दोषी कौन?

पंजाब के अमृतसर में दशहरे के मौके पर हुए  हादसे में 58 लोगों की जान चली  गई है. जोड़ा फाटक के पास लोग रेलवे ट्रेक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. इसी दौरान वे  ट्रेन की चपेट  में आ गए. हादसे में 50 के करीब लोगों के घायल होने की भी खबर है. पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्‍होंने राज्‍ य में एक दिन का राजकीय शोक भी घोषित किया है. ऐसे में शनिवार को स्‍कूल-कॉलेज और दफ्तर बंद रहेंगे. राज्‍य सरकार ने  मृतकों के परिवार के लिए पांच लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया है. वहीं केंद्र सरकार ने दो लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है. घटना पर काफी राजनीति भी हो रही है. हादसे की जिम्‍मेदारी  को लेकर भी आरोप-प्रत्‍यारोप भी तेज हो गए हैं.  रेलवे, स्‍थानीय प्रशासन और  दशहरा आयोजन समिति  की भूमिका शक के दायरे में है. रावण दहन की जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जिस जगह रावण का पुतला जलाया जा रहा था वह रेलवे ट्रेक से 70-80 मीटर ही दूर था. इसके चलते दहन देखने वाले लोग रेलवे ट्रेक पर भी खड़े थे. वहीं...

Amritsar Train Accident : मरते-मरते यूं 'रावण' ने बचाई कइयों की जान, पीछे छोड़ गया विधवा मां, पत्नी और 8 महीने का मासूम

Amritsar Train Accident: अमृतसर ट्रेन हादसे की चपेट में सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि खुद रावण का किरदार निभा रहे दलबीर सिंह भी आ गए. लोगों की जान बचाते-बचाते दलबीर सिंह खुद भी अपनी जान गवां बैठे. अमृतसर हादसा : रामलीला में 'रावण' का किरदार निभाने वाला दलबीर सिंह मरते-मरते बचा गया कइयों की जान नई दिल्ली:  Amritsar Train Accident:  अमृतसर में दशहरे के दिन बहुत बड़ा ट्रेन हादसा हुआ. इस दौरान रामलीला देखने आए कई लोगों को दो ट्रेनों ने अपनी चपेट में ले लिया. कोई अपने बच्चों के साथ इस मेले में पहुंचा था तो कोई अपने माता-पिता के साथ यहां रावण वध देखने आया था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह उनकी ज़िंदगी की आखिरी रामलीला होगी और रावण वध के साथ-साथ वह खुद भी अपनी जान गवां बैठेंगे. वहीं, इस हादसे की चपेट में सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि खुद रावण का किरदार निभा रहे दलबीर सिंह भी आ गए. लोगों की जान बचाते-बचाते दलबीर सिंह खुद भी अपनी जान गवां बैठे. हादसे के कुछ मिनट पहले ही वो रामलीला खत्म कर अपने घर अपने 8 महीने के बेटे से मिलने निकल चुके थे. लेकिन प...

इलाहाबाद का नाम बदलने पर कांग्रेस को ऐतराज, कहा- इतिहास पर पड़ेगा असर

कांग्रेस ने इलाहाबाद का नाम बदलने के फैसले का विरोध किया है. कांग्रेस का कहना है कि इलाबाहाद में जहां कुंभ लगता है उस जगह को पहले से प्रयागराज कहा जाता है. और अगर उत्तर प्रदेश सरकार शहर का नाम बदलना के लिए उतनी ही उत्सुक हैं तो इस जगह को अलग शहर बना देना चाहिए लेकिन इलाहाबाद का नाम नहीं बदला जाना चाहिए. इस मामले पर बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहा कि इलाहाबाद का  नाम बदलने से इससे जुड़े इतिहास पर भी असर पड़ेगा. कांग्रेस ने दिए ये तर्क ओंकार सिंह ने बताया कि आजादी की लड़ाई के दौरान इलाहाबाद प्रेरणा का एक मुख्य केंद्र रहा था. उन्होंने कहा कि 1888, 1892 और 1910 में कांग्रेस महाधिवेशन यहीं हुआ था. इसी शहर से देश को अपना पहला प्रधानमंत्री मिला. इसके अलावा अगर इलाहाबाद का नाम बदला गया तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी अपनी पहचान खो देगी. बीजेपी ने क्या कहा? वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने योगी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी है. बीजेपी प्रवक्ता मनोज मिश्रा ने बताया कि ये घोषणा लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर की गई है. उन्होंने कहा कि ...

इलाहाबाद अब फिर प्रयागराज हुआ, जानिए कैसे बदल गया था इसका नाम और किसने बदला था

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहबाद का नाम फिर से प्रयागराज कर दिया है। यानी इस शहर को वही प्राचीनतम नाम फिर मिल गया है जो करीब चार सौ साल पहले था।  योगी  कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित कर मूल नाम प्रयागराज पर मुहर लगा दी और राज्यपाल भी इसे मंजूर कर चुके हैं। अब तमाम सरकारी विभागों को सूचित किया जाएगा कि वो इलाहबाद की जगह प्रयागराज नाम का ही इस्तेमाल करें। वैसे, योगी ने 14 अक्टूबर को ही इस बात का ऐलान कर दिया था कि इलाहाबाद का नाम सरकार प्रयागराज करने जा रही है अर्द्ध कुंभ के पहले फैसला  अगले साल प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ लगने जा रहा है और धार्मिक दृष्टि से भी इसके मायने अहम हैं। यह अर्द्ध कुंभ अगले साल जनवरी में लगेगा। नाम बदले जाने को लेकर सियासी बयान आ रहे हैं और आ सकते हैं। लेकिन, ये सही है कि दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक इस शहर का नाम मूल रूप से प्रयाग ही था। इसका जिक्र ऋगवेद में भी मिलता है। फिर इलाहाबाद कैसे हुआ? प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुगल शासक अकबर ने जब इस क्षेत्र पर कब्जा किया तो उसने यहां एक किल...

जानिए प्रयागराज से इलाहाबाद और फिर प्रयागराज बनने की कहानी |

उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने मंगलवार को  इलाहाबाद शहर   का नाम बदलकर प्रयागराज करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी. इसके साथ ही 444 साल बाद एक बार फिर  प्रयागराज  को उसका अपना पुराना नाम मिल गया. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की वजह से इसे ऐतिहासिक रूप से तीर्थराज प्रयाग भी कहते हैं. रामचरित मानस जैसे पौराणिक ग्रंथों में भी प्रयागराज का जिक्र है. कहा जाता है कि कभी संगम के ही जल से देश के तमाम राजाओं-महाराजाओं का अभिषेक हुआ करता था. समय बीता और मुगलों का शासन आया. मुगल बादशाह अकबर ने 444 साल पहले 1574 में प्रयागराज का नाम बदलकर अल्लाहाबाद कर दिया. कालांतर में ये नाम इलाहाबाद हो गया. इसका जिक्र अकबरनामा और आईने अकबरी में भी किया गया है. वैसे धर्म के केंद्र के अलावा इलाहाबाद पढ़ाई के साथ राजनीति का भी अहम केंद्र रहा. आजादी से पहले जहां जवाहर लाल नेहरू की जन्मस्थली होने के कारण यहां स्थित आनंद भवन आजादी की लड़ाई और सत्ता के केंद्र में रहा. वहीं देश आजाद होने के बाद इलाहाबाद ने पढ़ाई में 'पूर्व का कैम्ब्रिज' दर्जा हासिल किया. इस शहर ने पू...

कुंभ: तैयारियों के लिए 30 नवम्बर तक की डेडलाइन, 15 हजार करोड़ की सौगात देंगे पीएम

कुंभ: तैयारियों के लिए 30 नवम्बर तक की डेडलाइन, 15 हजार करोड़ की सौगात देंगे पीएम फाइल फोटो इलाहाबाद कुंभ की तैयारियों को रफ्तार देने के लिए खुद कमान संभाल चुके सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो दिनों तक इलाहाबाद में रहकर विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और संतों से मुलाकात की। सीएम ने बताया कि उन्होंने कुंभ से जुड़े विकास कार्यों को पूरा करने के लिए 30 नवंबर की डेडलाइन तय कर दी है। बताया जा रहा है कि यहां करीब पंद्रह हजार करोड़ की लागत से 443 कार्यों को पूरा करने के बाद दिसंबर के पहले सप्ताह में पीएम नरेन्द्र मोदी से इसका लोकार्पण भी कराया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रण भेजा गया है। टॉप कॉमेंट मोदी जी अपनी जेब से देंगे क्या? ये जनता के खून पसीने की कमाई है. इलाहाबाद में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि कुंभ मेला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने का संदेश देगा। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला देश और दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है। सीएम ने कहा कि इस बार कुंभ मेले से स्वच्छता, समरसता और भारत की...

भाजपा सरकार प्रयाग कुंभ पर खर्च करेगी 4000 करोड़, कुछ ऐसी चल रही हैं तैयारियां

उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि प्रयाग कुंभ पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है और यह खर्च 4000 करोड़ रुपये तक जा सकता है प्रयाग कुंभ का खर्च 4000 करोड़ रु तक पहुंच सकता है : जोशी नई दिल्ली:  उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि प्रयाग कुंभ पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार 3000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है और यह खर्च 4000 करोड़ रुपये तक जा सकता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में प्रयाग में हुए कुंभ मेले के लिए तत्कालीन सरकार ने 700 करोड़ रुपये खर्च किए थे. इलाहाबाद जिले में 12 माधव एवं परिक्रमा पथ के अंतर्गत स्थित मंदिर स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्यों का शिलान्यास करने गंगापार जैतवार डीह गांव स्थित पड़िला महादेव मंदिर आईं जोशी ने कहा, "पिछले कुंभ में पिछली सरकार ने पर्यटन विभाग को कुल 3.25 करोड़ रुपये दिया था. इस बार केंद्र और प्रदेश ने मिलकर 86 करोड़ रुपये पर्यटन के विकास के लिए दिए हैं." उन्होंने बताया कि 12 माधव और परिक्रमा पथ के अंतर्गत कुल 29 मंदिरों के आसपास 30 लाख रु...