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इलाहाबाद अब फिर प्रयागराज हुआ, जानिए कैसे बदल गया था इसका नाम और किसने बदला था


लखनऊ.
 उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इलाहबाद का नाम फिर से प्रयागराज कर दिया है। यानी इस शहर को वही प्राचीनतम नाम फिर मिल गया है जो करीब चार सौ साल पहले था। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पारित कर मूल नाम प्रयागराज पर मुहर लगा दी और राज्यपाल भी इसे मंजूर कर चुके हैं। अब तमाम सरकारी विभागों को सूचित किया जाएगा कि वो इलाहबाद की जगह प्रयागराज नाम का ही इस्तेमाल करें। वैसे, योगी ने 14 अक्टूबर को ही इस बात का ऐलान कर दिया था कि इलाहाबाद का नाम सरकार प्रयागराज करने जा रही है
अगले साल प्रयागराज में अर्द्ध कुंभ लगने जा रहा है और धार्मिक दृष्टि से भी इसके मायने अहम हैं। यह अर्द्ध कुंभ अगले साल जनवरी में लगेगा। नाम बदले जाने को लेकर सियासी बयान आ रहे हैं और आ सकते हैं। लेकिन, ये सही है कि दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक इस शहर का नाम मूल रूप से प्रयाग ही था। इसका जिक्र ऋगवेद में भी मिलता है।
फिर इलाहाबाद कैसे हुआ?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुगल शासक अकबर ने जब इस क्षेत्र पर कब्जा किया तो उसने यहां एक किले का निर्माण कराया। इसके आसपास कुछ आबादी भी बसी। कालांतर में इसका नाम ‘इलाहाबास’ कर दिया गया। कहा जाता है कि अकबर इस शहर से बहुत प्रभावित था। इसकी वजह संगम था। यानी जीवन दायिनी गंगा, यमुना और सरस्वती की संगम स्थली। इतिहासकारों का कहना है कि अकबर के शासनकाल में कई लेख लिखने वाले अबुल फजल ने भी पियाग शब्द का जिक्र किया है जिसका मतलब प्रयाग ही है। धार्मिक कथाओं में भी प्रयाग के कुछ उल्लेख मिलते हैं। कहा जाता है कि ब्रम्हा, शिव और विष्णु ने यहां पूजा अर्चना की थी। ब्रिटिश शासनकाल में इसका नाम इलाहाबाद से अलाहाबाद कर दिया गया। इस दौर में यह प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण शहर था। अगस्त में योगी सरकार ने मुगल सराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय कर दिया था।

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