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बनारस या गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगी प्रियंका गांधी? सिब्बल के ट्वीट ने दिए संकेत

प्रियंका गांधी  - फोटो : PTI प्रियंका गांधी वाड्रा को अचानक से सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनाकर कांग्रेस पार्टी में एक जोश की लहर दौड़ गई है। इसकी एक वजह कांग्रेस पार्टी में समय-समय पर उठती मांग है। पार्टी के कई दिग्गज नेता प्रियंका को राजनीति में लाने की बात करते रहे हैं। अब अटकले हैं कि पार्टी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से मैदान में उतार सकती है। पार्टी के व के ट्वीच से तो यही संकेत मिल रहा है गुरुवार को कपिल सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, मोदीजी और अमित शाह ने कांग्रेस मुक्त भारत का आह्वान किया था। प्रियंका गांधी की अब उत्तर प्रदेश (पूर्वी) की राजनीति में आने से हम देखेंगे .... मुक्त वाराणसी? .... मुक्त गोरखपुर? राजनीतिक गलियारों में इन दिनों अटकले हैं कि प्रियंका को पूर्वी यूपी की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा। इस तरह की चर्चाओं का भी बाजार गर्म है कि उन्हें पीएम मोदी के खिलाफ पार्टी वाराणसी से अपना चेहरा बना सकती है।   प्रियंका को पार्टी ने पूर्वी यूपी की कमान सौंपी है। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया है। बुधवार को राह...

'कुंभ' ने नास्तिक को भी बना दिया आस्तिक: यह ऑस्ट्रेलियाई बाबा 'कुंभ स्नान' का बना चुका है रिकॉर्ड

इस बार प्रयागराज में चल रहे कुंभ (Kumbh2019) में ऑस्ट्रेलिया से आए सर्वांगगिरी बाबा सबका ध्यान खींच रहे हैं. खास बात यह है कि 1998 में भारत आने से पहले सर्वांगगिरी बाबा नास्तिक थे. ऑस्ट्रेलिया का यह बाबा दसवीं बार कुंभ पहुंचा खास बातें अभी तक दसवीं बार आ चुके हैं कुंभ भारत आने से पहले थे नास्तिक इस बार आकर्षण का केंद्र बने हैं बाबा प्रयागराज:  आस्था का पर्व कुंभ (Kumbh2019) न सिर्फ देश में रहने वाले लोगों के महत्वपूर्ण है बल्कि इसकी महत्ता इतनी है इसमें हिस्सा लेने के लिए लोग सात समन्दर पार से लोग हर बार भारत आते हैं. इस बार प्रयागराज में चल रहे कुंभ (Kumbh2019) में ऑस्ट्रेलिया से आए सर्वांगगिरी बाबा सबका ध्यान खींच रहे हैं. खास बात यह है कि 1998 में भारत आने से पहले सर्वांगगिरी बाबानास्तिक थे. मेलबर्न में पले-बढ़े ये बाबा पहले बस योग करते थे फिर भारत आकर सनातन धर्म से वाफ़िक़ हुए और अब धर्म-कर्म में रम गए हैं. भारत आने के बाद उन्होंने गुरु गुरु मंगलगिरी से शिक्षा ली. बाबा के अनुसार शुरू में उन्हें हिंदी समझने में दिक...

कुंभ से पहले प्रयागराज से 8 शहरों के लिए हवाई सेवाएं शुरू करेगा इंडिगो

कुम्भ से पहले इंडिगो प्रयागराज से आठ शहरों को लिए  हवाई सेवा शुरू  करने जा रही है. जबकि आज से प्रयागराज और बेंगलुरु के लिए हवाई सेवा से प्रारम्भ हो जाएगी. जिसका शुभारंभ बम्हरौली एयरपोर्ट पर प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी करेंगे. साथ ही इंडिगो कुंभ से पहले कोलकाता, पुणे और रायपुर के लिए भी हवाई सेवा शुरू करेगी. बता दें कि रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के तहत दूसरे दौर की बिडिंग में यूपी के नौ एयरपोर्ट एवं 22 एयर रूट का चयन हुआ है. इसमें प्रयागराज से 13 शहरों के लिए विमान सेवा शुरू होनी है. जेट एयरवेज ने पहले से ही प्रयागराज से लखनऊ, पटना, नागपुर और इंदौर के बीच हवाई सेवा शुरू कर दी है. बेंगलुरु हवाई सेवा शुरु होने के साथ ही प्रयागराज छह शहरों से जुड़ जायेगा. यही नहीं, कुम्भ मेले से पहले प्रयागराज को कई अन्य शहरों से भी हवाई सेवा से जोड़े जाने की तैयारी चल रही है. मंगलवार को छोड़कर इंडिगो की ये फ्लाइट हर दिन शाम चार बजकर 40 मिनट पर बम्हरौली एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए रवाना होगी

FLIPKART से इस्तीफे के बाद बोले बिन्नी- कुछ दिन और रहने की थी इच्छा

फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ बिन्नी बंसल ने मंगलवार को अपने इस्तीफे के बाद एक लेटर साझा किया है. जानें इस लेटर में उन्होंने क्या कहा है. ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ बिन्नी बंसल ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद कंपनी के कर्मचारियों के लिए अपना लेटर साझा किया है. इसमें उन्होंने कहा कि  साल 2007 में हमने मामूली संसाधनों के साथ फ्लिपकार्ट की यात्रा शुरू की थी. इस दौरान सफर कठिन भी रहा, लेकिन हमें सफलता भी मिली. इस साल की शुरुआत में हमनें वॉलमार्ट के साथ साझेदारी की. वो हमारे बेहतरीन पार्टनर हैं और मैं हमारे अच्छे भविष्य के लिए आशावादी हूं. बता दें कि मंगलवार को फ्लिपकार्ट के ग्रुप सीईओ बिन्नी बंसल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसकी जानकारी कंपनी ने एक बयान जारी कर दी. कंपनी ने कहा कि बिन्नी कंपनी की स्थापना से लेकर अब तक कंपनी का अहम हिस्सा रहे हैं. बिन्नी बंसल का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब उनके खिलाफ पर्सनल मिसकंडक्ट करने के आरोप में जांच चल रही थी. फ्लिपकार्ट फैमिली के लिए अपने लेटर में बिन्नी ने कहा कि वॉलमार्ट के साथ सौदा हो जाने के बाद उनक...

Statue of Unity: दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति की जानें ये 10 खास बातें

Statue Of Unity: 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती है और इस बार यह जयंती खास होगी. दरअसल इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह विश्व की सबसे ऊंची गगनचुंबी प्रतिमा है. जानते हैं इस प्रतिमा से जुड़ी खास बातें... Statue Of Unity: सरदार पटेल की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनकर तैयार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को इस प्रतिमा का उद्घाटन करेंगे. यह मूर्ति सरदार वल्लभ भाई पटेल की है, जो हमेशा जमीन से जुड़े रहे और अब वे आसमान की भी शोभा बढ़ाएंगे. आइए जानते हैं इस मूर्ति की 11 खास बातें, जो आप शायद ही जानते होंगे... - मूर्ति की लंबाई 182 मीटर है और यह इतनी बड़ी है कि इसे 7 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है. बता दें कि 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' ऊंचाई में अमेरिका के 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' (93 मीटर) से दोगुना है. - इस मूर्ति में दो लिफ्ट भी लगी है, जिनके माध्यम से आप सरदार पटेल की छाती पहुंचेंगे और वहां से आप सरदार सरोवर बांध का नजारा देख सकेंगे और खूबसूरत वादियों...

इलाहाबाद का नाम बदलने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती

फाइल फोटो: इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रयागराज   उत्तर प्रदेश में   इलाहाबाद   का नाम बदलकर प्रयागराज करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद   हाई कोर्ट   में याचिका दाखिल की गई है। अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने यह जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पक्षकार बनाया गया है।   याची के अधिवक्ता विजय चन्द्र  श्रीवास्तव ने बताया, 'पहले 'इला' के नाम से 'इलावास' बसाया गया   था, जिसे बाद में इलाहाबाद कहा जाने लगा। लोग सैकड़ों साल से प्रयाग को इलाहाबाद के नाम से जानते हैं।' याचिका में अर्द्धकुंभ को कुंभ घोषित करने पर भी आपत्ति की गई है। 18 अक्टूबर 2018 को जारी की गई अधिसूचना को भी याचिका को चुनौती दी गई है। इसी अधिसूचना में राज्य सरकार द्वारा इलाहाबाद का नाम प्रयागराज घोषित किया गया था।   गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी आदित्यनाथ सरकार ने 18 अक्टूबर को अधिसूचना जारी करके ऐलान किया था कि इलाहाबाद को अब प्रयागराज के नाम से जाना जाएगा। इस परिवर्तन के पीछे सरकार का तर्क था कि पहले इस शहर का नाम प्रयाग ही ...

जमीन पर उतरा योगी का 'प्रयागराज', बदल गया DM दफ्तर का नाम

योगी सरकार द्वारा बदला गया इलाहाबाद के नाम का असर अब कागज से उतरकर सच्चाई में दिखने लगा है. इलाहाबाद के डीएम दफ्तर के बाहर जिलाधिकारी प्रयागराज के बैनर लग गए हैं. डीएम दफ्तर के बाहर की तस्वीर, फोटो क्रेडिट- पीटीआई उत्तर प्रदेश की  योगी  सरकार द्वारा कुंभनगरी  इलाहाबाद  पर बहस अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि इसका असर जमीन पर दिखना शुरू हो गया है. आधिकारिक रूप से नाम बदलने के कुछ दिन बाद ही इलाहाबाद के जिला अधिकारी  दफ्तर  (DM दफ्तर) का नाम भी बदल गया है. डीएम ऑफिस के बाहर अब "जिला अधिकारी, प्रयागराज" का बैनर चस्पा कर दिया गया है. बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने 16 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से इलाहाबाद का नाम बदलने का फैसला किया था. इस प्रस्ताव की मंजूरी राज्यपाल रामनाइक के द्वारा भी मिल गई थी. विपक्ष के निशाने पर था फैसला नाम बदलने की इस परंपरा पर विपक्ष की कई पार्टियों ने सवाल उठाए थे, कांग्रेस-सपा-बसपा ने इलाहाबाद का नाम बदलने का पुरजोर विरोध किया था. इसके अलावा सोशल मीडिया पर इस खबर ने काफी सुर्खियां ब...